Wednesday, October 7, 2009

"एक बात और..."



दोस्तों एक बार फ़िर से मैं आपके बीच हूँ !
पता है आज मेरी मम्मी एक गाना गा रही थी मेरे लिए ...
चंदा है तू , मेरा सूरज है तू
तू मेरी आंखों का तारा है तू......
बहुत अच्छा लग रहा था मुझे ...


हा हा हा हा ....हँसी आ गई मुझको , क्यों ? मेरी बड़ी मम्मी ना हमेशा मुझको ये सुनाती है....
मैं आप लोग को सुनाऊँ ?
बिल्ली मौसी बिल्ली मौसी,
कहो कहाँ से आई हो?
कितने चूहे मारे तुमने,
कितने खा के आई हो?
क्या बताऊँ ........शीला माई....
आज नही कुछ पेट भरा
एक ही चूहा पाया मैंने
वो भी बिल्कुल सड़ा हुआ!

जब मैं ऐसे गाना सुनाऊंगा ना तो कितना मजा आएगा है ना?
अभी तो मैं बोल नहीं सकता ना ....बस हँसता हूँ और किलकारियां मरता हूँ ......
एक बात बताऊँ आप लोगों को ?

मेरे पापा ना दिवाली त्यौहार में आ रहें हैं मुझसे मिलने। कितना मज़ा आएगा।
आप लोगों को भी मेरी ओर से दीपावली की बहुत बहुत बहुत .........सारी हार्दिक बधाइयाँ......

आपका प्यारा आदित्य

1 comment:

  1. कम शब्दों में बहुत सुन्दर कविता।
    बहुत सुन्दर रचना । आभार

    ढेर सारी शुभकामनायें.

    SANJAY KUMAR
    HARYANA
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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