Saturday, November 28, 2009

"मेरे सपने पूरे होंगे?..."



ओ नन्हीं सी प्यारी गुड़िया क्या सोच रही हो?
...
...
उड़ते पंछियों को देख रही हूँ.....

देखो!.. कैसे मजे से आसमान में उड़ रहे हैं....मैं भी उन जैसा उड़ना चाहती हूँ.....

सारी खुशियाँ समेट कर अपनी झोली में रखना चाहती हूँ.....

और देखो उधर बच्चे कैसे खेल रहे हैं कितनी शैतानियाँ भी कर रहें है हा हा हा ....
मैं भी उनके साथ खेलना चाहती हूँ.....
और उन्हें देखिये उन बच्चों को मिट्टी से कुछ बना रहें हैं ...मैं भी मिट्टी से अपना घर बनाऊंगी, फूलों से अपना प्यारा घर सजाऊंगी.......
और हाँ मेरी एक छोटी सी प्यारी सी गुड़िया भी होगी उसकी शादी भी करुँगी.......
क्या ऐसा हो पायेगा?
उधर देखिये सारे बच्चे पाठशाला जा रहें हैं!
......क्या मुझे भी जाने मिलेगा?......
दीदी.... अभी मैं जाती हूँ,.. आप से फ़िर कभी बात होगी अभी मुझे माँ के साथ काम पे जाना है ना ...

Friday, November 20, 2009

"राधा और कृष्ण...."

मुरली की मधुर तान से समस्त वातावरण गूंज उठा। प्रेम व करुणा रस से भरे इस ध्वनि से अत्यधिक विचलित होने वाला मन राधा का था।

आप ही उसके कदम धुन की दिशा की ओर बढ़ने लगे। प्रेम में डूबी राधा मुग्ध अवस्था में ही मुरलीधर के चरणों को अपने कोमल हाथों से पकड़े अपना माथा लगाया, नैनों से अविरल बहते गंगा जल सी पवित्र अँसुअन से उनके चरण भिगोये।

मुरली बजाने में तल्लीन कृष्ण ने धीमे से अपने अपने नैनों को खोला, समीप राधा को चरणों में देखकर मन भावविहल हो उठा। हाथों से राधा को उठाया व गले लगाया तो ऐसा लग रहा था प्रकृति और उनके प्रेम एक दुसरे में समां गए हों।

उनके प्रेम से सारा संसार अविभूत है उनके पवित्र प्रेम पर कोई भी उंगली नहीं उठा सकता , प्रेम एक आत्मा का दूसरी आत्मा से था ना की एक शरीर का दुसरे शरीर से था।

Wednesday, November 18, 2009

अहोभाग्य...

अहोभाग्य हमारा नीरज जी ! कि इस गरीब की कुटिया में आपने कदम रखा। क्या लेंगे ?
गुस्ताखी माफ़ हो अगर बन्दे से मेहमाननवाजी में कोई कमी रह गई हो!
आपका बहुत बहुत शुक्रिया .....
आपका मार्गदर्शन हमें मिलता रहे ....इस आशा के साथ आपका पुन: शुक्रिया!

Sunday, November 15, 2009

मुझे भी खुश रहना है ...."



मुझे भी जीने दो


बादल हूँ बरसने दो


कलि हूँ खिलने दो


फूल हूँ महकने दो


रंग हूँ बिखरने दो