Thursday, September 24, 2009

आज बिरज में होली है रे रसिया









आज बिरज में होली रे रसिया
होरी है रे रसिया, बरजोरी है रे रसिया। आज
बिरज में ....

इत तन श्याम सखा संग निकसे
उत वृषभान दुलारी है रे रसिया। आज बिरज में....

ब्रत गुलाल लाल भये बादर
केसर की पिचकारी है रे रसिया। आज बिरज में .....

बाजत बीन, मृदंग, झांझ डफली ,
गावत दे -दे - तारी रे रसिया। आज बिरज में ......

श्यामा श्याम मिल होली खेलें,
तन मन
धन बलिहारी रे रसिया,
आज बिरज में होली रे रसिया।

(बृजभाषा लोकगीत से संकलित कविता )

5 comments:

  1. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    SANJAY KUMAR
    HARYANA
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    ReplyDelete
  2. संजीत जी एवं संजय जी आप सभी का शुक्रिया

    ReplyDelete
  3. काबिलेतारीफ बेहतरीन

    ReplyDelete

आपके टिप्पणियों का स्वागत है.