Wednesday, September 30, 2009

नारी और सृजनशीलता


अलख पुरूष जब किया विचारा
लख चौरासी धागा डारा
पञ्च तत्व की गुदरी बीनी
तीन गुणन की ठाढ़ी किन्ही
ता में जीव ब्रम्ह औ माया .....


(कबीर उपासना से संकलित)

2 comments:

संजय भास्कर said...

nice

Roshani said...

धन्यवाद् संजय जी, यह चित्र भिलाई इस्पात सयंत्र द्वारा आयोजित चित्र प्रदर्शनी के लिए बनाया था इसमें मैंने नारी की तुलना सृष्टि से की है.